
ब्रज की धरती पर लगा भक्ति का महाकुंभ, लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी
बरसाना। ब्रज की धरती पर इन दिनों भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। प्रेम सरोवर के समीप मैदान में अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के मुखारविंद से जारी शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन भी लाखों श्रद्धालु उमड़े। कथा स्थल से लेकर आसपास के मार्गों तक श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। हर ओर ‘राधे-राधे और हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे। मंगलवार को कथा के दौरान अर्धनारीश्वर की मनोहारी झांकी सजाई गई।
लाखों श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त पंडाल, मार्गों पर भीड़
कथा में पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि भगवान शिव की आराधना करने वाला भक्त कभी दुखी नहीं रहता। भोलेनाथ अपने भक्तों की पुकार सुनते हैं। उनकी भक्ति में ऐसी शक्ति है कि वे कभी भी किसी मनुष्य के जीवन की दिशा बदल सकते हैं। आवश्यकता केवल इस बात की है कि भक्त भगवान भोलेनाथ पर अटूट विश्वास रखे और प्रतिदिन उनकी आराधना करे। उन्होंने कहा कि कर्म का फल तुरंत नहीं मिलता तो इसका अर्थ यह नहीं कि मनुष्य अपने कर्मों के परिणाम से हमेशा के लिए बच गया। भगवान की प्राप्ति दिखावे से नहीं, बल्कि सरलता और सहजता से होती है। भगवान को प्रसन्न करने के लिए दिखावा नहीं, एक लोटा जल और सच्ची श्रद्धा ही पर्याप्त है।
शिव महापुराण के दूसरे दिन भी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए विठलेश सेवा समिति ने अतिरिक्त पंडालों की व्यवस्था की।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा के दौरान कर्मफल के सिद्धांत को समझाते हुए कहा कि कर्मफल एक ऐसा अमिट तथ्य है, जिसे मनुष्य को आज नहीं तो कल भोगना ही पड़ता है। कई बार कर्मों के परिणाम मिलने में इसलिए विलंब होता है कि ईश्वर मनुष्य की बुद्धि और विवेक की परीक्षा लेते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्रों में संचित कर्म का उल्लेख मिलता है। पूर्व जन्म के कर्मों के फल को अगले जन्म में भोगने की मान्यता के कारण भारतीय परंपरा में पुनर्जन्म की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए मनुष्य को वर्तमान जीवन में अच्छे कर्म करते रहना चाहिए।कथा की सार्थकता संदेश को जीवन में उतारने मेंउन्होंने कहाकि किसी भी कथा के श्रवण की सार्थकता तभी है, जब उसके संदेश को व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में उतारे। केवल कथा सुनना पर्याप्त नहीं है। कथा में बताए गए सद्मार्ग, सेवा, भक्ति और सदाचार को जीवन का हिस्सा बनाकर ही मनुष्य आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन को आनंदमय और मंगलमय बनाते हुए प्रत्येक क्षण अच्छे कर्म और भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की ओर से पत्र प्राप्त होते हैं, जिनमें उन्होंने अपनी आस्था और जीवन में आए बदलावों का उल्लेख किया है। इनमें रोजगार, संतान प्राप्ति और रोगों से राहत जैसी अनुभूतियों का भी श्रद्धालुओं ने उल्लेख किया है।



