
साँझी मेले में अवतरित होंगे ठा.श्री गोविन्ददेव जी
वृन्दावन। जीएलए विश्वविद्यालय मथुरा एवं ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में 2 अक्टूबर से 4 अक्टूबर 2026 तक पौराणिक ब्रह्मकुंड पर आयोजित होने वाले साँझी मेले के विषय में आयोजकों ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी।2015 में द ब्रज फाउंडेशन द्वारा शुरू किए गए साँझी मेले को हर वर्ष बड़ी धूमधाम से बनाया जाता है।
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने बताया कि इस बार साँझी मेला ठा. श्री गोविंददेव जी पर एकाग्र होगा। ब्रज में साँझी कला धरोहर के साथ-साथ उपासना में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह पारंपरिक कला ग्रामीण अंचल में महिलाओं द्वारा लोक अनुष्ठान के रूप में दीवारों पर गाय के गोबर से बनाई जाती है। जिसमें विभिन्न फूलों और प्रकृति को का उपयोग किया जाता है साँझी कला का महत्व न केवल इसकी सुंदरता में है बल्कि इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है यह कला साधकों की रचनात्मक और भक्ति का प्रतीक है।
जयप्रकाश सारस्वत ने कहा कि ब्रज की साँझी में मुख्य रूप से श्रीकृष्ण कथा को चित्रित किया जाता है। जैसे कि ब्रज लीलाएँ और निकुंज लीलाएँ तथा लीला स्थल आदि ब्रज की साँझी कला के संरक्षण में ब्रह्मकुंड साँझी मेले का महत्वपूर्ण योगदान है। इस बार 10 वाँ साँझी मेला 2, 3 व 4 अक्टूबर को प्रतिदिन शाम 6 से 9:00 तक आयोजित किया जा रहा है, जो विशेष रूप से वृन्दावन के प्रमुख देवता ठाकुर श्री गोविंददेव जी महाराज के चित्रण पर समर्पित होगा। पौराणिक आख्यानों के साथ गोविन्द देव जी प्रथम बार साँझी मेला में भव्यरूप से अवतरित होंगे ।
कार्यक्रम संयोजक गोपाल शरण शर्मा एवं आनंद यादव ने कहा कि मेले में साँझी पद गायन व आरती एवं नित्य के विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों साथ साँझी के इतिहास पर प्रदर्शनी कलाकारों द्वारा अनेक शैलियों में साँझियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस अवसर पर साँझी और रंगोली प्रतियोगिता तथा कलाकारों का सम्मान भी किया जायेगा। साँझी कला के माध्यम से कलाकारों को सशक्त बनाने और उनकी रचनात्मकता को बढ़ावा देने के प्रयास भी किया जा रहे हैं इससे न केवल साँझी कला का संरक्षण होगा बल्कि कलाकारों को भी आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर जे. पी सारस्वत, एन. एल. शर्मा, आनंद यादव, गोपाल शरण शर्मा, विश्वजीत दास ब्रजगोपाल चित्रकार, कमलेश्वर शर्मा, जगदीश आदि उपस्थित रहे।



