
15 हजार से अधिक श्रद्धालु और सैकड़ों विदेशी भक्त हुए शामिल, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लिया 36 दिवसीय यात्रा का संकल्प
बरसाना(ब्रज ब्रेकिंग न्यूज)। वैदिक मंत्रोच्चार, ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना के साथ शनिवार को 35वीं श्रीराधारानी ब्रजयात्रा का शुभारंभ हुआ। ब्रजनिष्ठ संत पद्मश्री रमेश बाबा महाराज द्वारा प्रारंभ की गई इस वार्षिक यात्रा में देश के विभिन्न प्रांतों से 15 हजार से अधिक श्रद्धालु और सैकड़ों विदेशी भक्त शामिल हुए। यात्रा से पहले सभी ब्रजयात्रियों ने 36 दिवसीय यात्रा के नियम और संकल्प ग्रहण किए। राधा नाम संकीर्तन करते हुए निकली यात्रा के पहले दिन श्रद्धालुओं ने तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला, सूर्यकुंड, नौबारी-चौबारी और रत्नकुंड के दर्शन किए। यात्रा 26 नवंबर को बरसाना लौटकर संपन्न होगी।

बरसाना स्थित माताजी गौशाला के समीप बनाए गए यात्रा शिविर में मान मंदिर के आचार्य पंडित महेश चंद्र शास्त्री और सुरेश चंद्र शास्त्री ने वैदिक रीति से यात्रियों को संकल्प दिलाया तथा वैष्णव परंपरा के अनुसार यात्रा के नियम समझाए। इसके बाद डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नरसिंह दास महाराज और राधाकांत शास्त्री सहित संतों ने ध्वज पूजन, कन्या पूजन और ठाकुरजी की पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद ठाकुरजी के डोले के पीछे-पीछे राधा नाम संकीर्तन करते हुए श्रद्धालु यात्रा पर निकले।
यात्रा सबसे पहले माताजी गौशाला पहुंची, जहां गौसेवकों ने पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इसके बाद ब्रजयात्रियों का विशाल समूह तुंगविद्या सखी के गांव ढभाला पहुंचा। यहां सूर्यकुंड स्थित तुंगविद्या सखी मंदिर में दर्शन किए गए। गांव के ब्रजवासियों ने यात्रियों का स्वागत कर केला प्रसाद भेंट किया। इसके बाद यात्रा नौबारी-चौबारी पहुंची, जहां यात्रा का नेतृत्व कर रहे नरसिंह दास महाराज ने स्थल की धार्मिक महत्ता बताई। उन्होंने बताया कि ब्रज की मान्यता के अनुसार, यहां श्रीराधारानी अपनी सखियों के साथ गुड्डा-गुड़िया का खेल खेलती थीं और श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ समीप स्थित पर्वत की श्यामशिला से इन बाल लीलाओं का दर्शन करते थे।

नौबारी-चौबारी के बाद श्रद्धालुओं ने रत्नकुंड के दर्शन किए। इसके बाद राधा नाम संकीर्तन करते हुए यात्रा अपने पड़ाव स्थल पहुंची, जहां प्रमुख व्यवस्थापक ब्रजदास ने स्वयंसेवकों के सहयोग से यात्रियों के लिए प्रसाद की व्यवस्था कराई। शाम पांच बजे मुख्य यात्रा पंडाल में भक्तशरण महाराज ने पहले दिन दर्शन किए गए तीर्थस्थलों की शास्त्रीय एवं धार्मिक महिमा बताई। विभिन्न ग्रंथों में वर्णित मंत्रों के माध्यम से प्रार्थना कराकर श्रद्धालुओं को तीर्थस्थलों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विधान कराया गया।
यात्रा व्यवस्थापक राधाकांत शास्त्री और ब्रजदास ने बताया कि मान मंदिर सेवा संस्थान रमेश बाबा महाराज के आदर्शों और सेवा-संकल्पों के अनुरूप यात्रा का संचालन कर रहा है। यात्रियों के भोजन, आवास, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं निशुल्क रहेंगी। यात्रा का उद्देश्य ब्रज के पवित्र स्थलों के दर्शन के साथ श्रीराधारानी की भक्ति, गौसेवा और ब्रज की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का प्रसार करना है।
यात्रा प्रबंधन के अनुसार, रविवार को श्रद्धालु मान मंदिर, कुशल बिहारी मंदिर, श्रीजी मंदिर, दानगढ़, मयूरकुटी, सांकरी खोर, विलासगढ़, माहेश्वर सर और दोहनी कुंड के दर्शन करेंगे। आगामी दिनों में यात्रा नंदगांव, सिरथला, होडल, भिड़ूकी, धनौता, उझानी, विहारवन, गंगरौल, भांडीरवन, बेलवन, वृंदावन, दाऊजी, चिंताहरण महादेव, रावल, मधुवन, बहुलावन, मुखराई, पूछरी, उमराव, टांकोली, खोह, आदिबद्री, केदारनाथ और कामां सहित ब्रज के विभिन्न धार्मिक स्थलों से होकर गुजरेगी। यात्रा में डॉ. रामजीलाल शास्त्री, मान मंदिर के महंत ब्रजशरण दास महाराज, नीलमणि बाबा, लाल बाबा, राजकुमार गरुण, भगत जी, संजय सिंह प्रधान, बंसी मेंबर, भारत गोस्वामी, राघव गोस्वामी और सज्जन शर्मा सहित अनेक संत, सेवक और श्रद्धालु मौजूद रहे।




