
बरसाना की माताजी गोशाला में रमेश भाई ओझा ने भक्तों को सुनाई चतुर्थ दिवस की कथा
बरसाना(ब्रज ब्रेकिंग न्यूज)। राधिकाजी श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति हैं, ये श्रीकृष्ण से भिन्न नहीं हैं अपितु उनकी आत्मा ही हैं। इसलिए ज्ञान की दृष्टि से जो आत्माराम हैं वही भक्ति की दृष्टि से राधारमण हैं। रासलीला भी ज्ञान की दृष्टि से आत्मरमण ही है। जिसकी अपनी आत्मा में रति है उसके लिए कोई कर्त्तव्य कर्म नहीं रह जाता। यह उद्गार प्रख्यात श्रीमद्भागवत कथा प्रवक्ता रमेश भाई ओझा ने माताजी गोशाला में कथा सुनाते हुए व्यासपीठ से व्यक्त किए।
शुक्रवार को बरसाना की माताजी गोशाला में चल रही अष्टदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा और नवदिवसीय सीताराम विवाहोत्सव समारोह के चतुर्थ दिवस की कथा सुनाकर प्रवक्ता रमेश भाई ओझा ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। भाईजी ने कहा कि बरसाना वालों का घनश्याम से अनूठा नाता है, यह नाता राधाजी की वजह से है इसलिए बरसाना में श्रीकृष्ण चन्द्र जी की पहचान राधावर के रूप में ही है। यहां पर कन्हैयालाल की महिमा राधालली से ही है।
सत्य, तप, पवित्रता और दया ये चार धर्म के चार चरण बताए गए हैं। वृषभानु जी इन चारों गुणों से युक्त धर्माचरण करने वाले थे तभी उन्हीं राधिकाजी पुत्री के रूप में प्राप्त हुईं। वस्तुतः व्यक्ति के पुण्यों के फलस्वरूप परमात्मा द्वारा प्रदत्त कृपा ही पुत्री के रूप में जीवन में आती है।
भागवत के वक्ता और श्रोताओं के विषय पर बोलते हुए भाईजी ने कहा कि वक्ता को अपने पांडित्य का अभिमान नहीं होना चाहिए और श्रोताओं को अपने पद, प्रतिष्ठा और धन के अभिमान से रहित होकर कथा सुननी चाहिए। भागवत पुराण भागवतों यानी भक्तों का पुराण है। यह भक्तों का भक्तों के द्वारा भक्तों के कल्याण के लिए है। यह जीव की भगवान में रति कराती है।
कुछ लोग स्वर्ग प्राप्ति को अपने जीवन का लक्ष्य बनाते हैं, वहीं कुछ लोग स्वर्ग से श्रेष्ठ मुक्ति को मानकर उसकी चाह रखते हैं। पर हरिभक्ति मुक्ति से भी श्रेष्ठ और सुखदायक है।
संध्या काल में सीताराम विवाहोत्सव कार्यक्रम में बक्सर वाले श्री नारायण भक्तमाली मामाजी की बेटी सिया दीदी और उनके सहयोगियों के द्वारा सीताजी के जन्म की लीला का सरस मंचन किया गया।
इस अवसर पर गीता मनीषी संत ज्ञानानंद महाराज, भागवत प्रवक्ता कृष्णचंद्र ठाकुरजी, संत दीनबंधु दास, पूरन कौशिक, कन्हैयालाल अग्रवाल, उमाकांत, नृसिंह बाबा, मान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामजीलाल शास्त्री, कार्यकारी अधिकारी राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह ब्रजदास, माताजी गोशाला के संयोजक ब्रजशरण दास बाबा, पद्मेश गुप्ता, अनुराधा गुप्ता आदि उपस्थित रहे।



