
फुले दंपति को भारत रत्न देने की मांग
मथुरा। भारत की पहली शिक्षिका एवं नारी शिक्षा की अग्रदूत क्रांति ज्योति माता सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर गत दिनों डॉ. अंबेडकर पार्क, इन्द्रपुरी कॉलोनी में पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय बौद्ध महासभ एवं डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने माता सावित्रीबाई फुले के जीवन-संघर्ष, त्याग, बलिदान और सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा को सामाजिक मुक्ति का सबसे बड़ा हथियार माना। वक्ताओं ने सावित्रीबाई फुले की कविताओं और विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके संदेश— “उठो, सीखो और कार्य करो”, “ज्ञान ही सबसे बड़ा धन है” और “स्वाभिमान से जीना है तो पढ़ाई करो”— आज भी सामाजिक समानता और जागरूकता के लिए प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम में दलितों, स्त्रियों और वंचित वर्गों को शिक्षा के माध्यम से गुलामी से मुक्त होने का उनका आह्वान विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने केंद्र सरकार से माता सावित्रीबाई फुले एवं महात्मा ज्योतिराव फुले दंपति को भारत रत्न प्रदान किए जाने की पुरजोर मांग की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. बीरआर अंबेडकर सामाजिक विकास समिति के अध्यक्ष करन सिंह ठेकेदार और संचालन भारतीय बौद्ध महासभा अध्य्क्ष डॉ. अनिल कुमार ‘दिनकर ने किया। इस अवसर पर भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा प्रकाशित कैलेंडर–2026 का विमोचन किया गया। साथ ही राष्ट्रीय एकता साहित्यिक मंच द्वारा भारतीय रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त जगदीश प्रसाद सागर का साफा बांधकर, शाल ओढ़ाकर एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर गरिमामय सम्मान किया गया।
पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में सुनील कुमार कर्दम, ईश्वरी प्रसाद गौतम, यजवीर सिंह विद्रोही, जगदीश प्रसाद, महेंद्र प्रताप सिंह, डी.के. भास्कर, राकेश, लक्ष्मीचंद, हरीश कुमार, मोनू, भगवान सिंह, कवि लाखन सिंह ‘हलचल’, कवि सिद्धार्थ प्रकाश, बद्री प्रसाद, दुर्गा प्रसाद ठेकेदार, तेजाराम, उत्कर्ष, मयंक, यश, शिवा भगवान सिंह, मान सिंह, वीरेंद्र सिंह सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



