
भावरूप ब्रज –वृंदावन : चिताएं एवं चुनौतियां विषयक संगोष्ठी संपन्न
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान ने कराया आयोजन, किया विद्वतजनों का सम्मान
वृन्दावन(ब्रज ब्रेकिंग न्यूज)। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान, श्रीधाम गोदा विहार मंदिर में “भावरूप ब्रज –वृंदावन : चिताएं एवं चुनौतियां विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वानों ने मंथन कर अपने विचार प्रगट किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ.कृष्णचंद्र गोस्वामी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में धार्मिकता व्यावसायिकता में परिवर्तित हो गई है और वृन्दावन नव वृंदावन में। उन्होंने कहा कि वृंदावन आने के अर्थ में पूर्व में जिन संतों ने वृंदावन में वास किया वह वैभव छोड़ कर ब्रज के भाव को हृदय में धारण कर आए। आज लोग वैभव भाव के साथ वृंदावन आ रहे हैं।मुख्य अतिथि डॉ. ब्रजेंद्र सिंहल ने कहा कि भाव का उज्ज्वल रूप ही भक्ति है। जब भाव होगा तभी ब्रजवास होगा।
हित चंद्रप्रकाश शर्मा ने कहा कि ब्रज में रहकर ब्रज की चिंता न करना अपराध के समान है। उन्होंने प्रशासन की उदासीनता और नगर निगम की असंवेदन शीलता पर दुःख प्रकट किया।
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मीनारायण तिवारी ने वृंदावन के भाव रूप के विचार को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि जिस प्रकार वृंदावन से ब्रिटिश काल में शिकार पाबंदी के लिए आंदोलन हुआ आज उसी प्रकार का प्रयास ब्रज के स्वरूप को बचाने के लिए होना आवश्यक है।
कार्यक्रम में बरसाने से योगेंद्र छोंकर, नंदगांव से गौरव गोस्वामी, गोवर्धन से डॉ.हर्षवर्धन, वृन्दावन से सुधीर शुक्ला, डॉ, भगवतकृष्ण नांगिया, किशोरवन सेवायत जय किशोर गोस्वामी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में बांके बिहारी कॉरिडोर आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली नीलम गोस्वामी को भी सम्मानित किया गया।इस अवसर पर रसभारती संस्थान के निदेशक एवं राधावल्लभ साहित्य मर्मज्ञ विद्वान डॉ.जयेश खंडेलवाल, सुरेश चंद्र शर्मा, डॉ.राजेश सेन, यश सोनी, गोविंद शरण शर्मा, विश्वजीत दास, ब्रजगोपाल चित्रकार, कमलेश्वर शर्मा आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रकाशन अधिकारी गोपाल शरण शर्मा ने किया।



