
बरसाना(ब्रज ब्रेकिंग न्यूज़)। कस्बे से दो तीन किमी दूर बने पार्किंग स्थलों से पैदल चले आ रहे श्रद्धालुओं के चेहरे पर कोई थकान नहीं दिख रही, धूप की तपिश से पसीना जरूर है पर उल्लास से सराबोर हैं। हों भी क्यों न, आज मौका जो खास है। सारे संसार पर अपनी करुणामई दृष्टि रखने वाली राधारानी का जन्मोत्सव जो है! भला कौन होगा जो इसका साक्षी न होना चाहेगा। वृषभानु बाबा व कीरत मैया की लाडली राधा के जन्मोत्सव की धूम अकेले ब्रजमंडल में ही नहीं मानो तीनों लोकों में मची हुई है। सबको इंतजार है।

समूचे ब्रजमंडल के साथ-साथ गंधर्व भी हर्ष और उल्लास के साथ कन्हैया की प्राण प्रिय राधारानी के आगमन की खुशी में फूले नहीं समा रहे है। सबको बेसब्री से वृषभानु नंदिनी के आने का इंतजार है। हर कोई उस दिव्य व अलौकिक शक्ति के दर्शन को उत्सुक हो रहा था जिसके दर्शन मिलने से मनुष्य भाव सागर से पार हो जाता है। ऐसी पराशक्ति राधारानी आज अपने भक्तों के लिए फिर अवतरण होगी। राधा के अवतरण की खुशी में बरसाना के घर-घर में मंगल गीत गाए जा रहे थे।

कस्बे के प्रसिद्ध लाडली जी मन्दिर में सुबह से लेकर रात्रि तक भक्ति की रस वर्षा हुई जिसमें डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु बेताब नजर आ रहे थे। राधारानी की एक झलक के दर्शन करने के लिए उनके भक्त भीड़ के रेला की परवाह न करते हुए बस राधे राधे के जयकारे लगाते हुए भीड़ के समुद्र को पार कर रहे थे। जगह जगह भजन संकीर्तन पर थिरक रहे है और श्रीजी के अभिषेक के समय का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

राधाष्टमी की धूम बरसाना में मची है। ब्रहमांचल पर्वत पर राधारानी के मंदिर में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। मंदिर परिसर में बधाई गायन की धूम मची है। तड़के राधारानी के विग्रह का अभिषेक होगा। कृष्ण की आल्हादिनी शक्ति के अवतरित होने पर नंदगांव से भी सेवायत बधाई देने पहुंचे। शनिवार देर रात तक यही नजारा देखने को मिला।

अब सबको इंतजार है रविवार की सुबह का। जब शुभ घड़ी में राधारानी का जन्माभिषेक किया जाएगा। जन्म से पूर्व लाड़ली जी मंदिर में रात दो बजे से मंगल बधाइयों का गायन किया जाएगा। इसमें दाई, मान, सवासनी, नाइन, नामकरण आदि लीलाओं के पदों का गायन किया जाएगा।

मूल शांति के बाद अभिषेक कराया जाएगा। मंदिर के सेवायत परिवारों के आचार्य वेद मंत्रों के उच्चारण के मध्य मूल नक्षत्र में जन्मी राधारानी का रविवार की सुबह चार बजे से लगातार एक घंटा अभिषेक करेंगे। दूध, दही, शहद, गाय का घी, इत्र, बूरा, 27 पेड़ों की पत्तियां, 27 जगह की रज, 27 कुओं का जल, सप्त अनाज, सात मेवा, सात फल से बारी-बारी से वृषभानु नंदनी के विग्रह का अभिषेक कराया जाएगा।

पीले रंग की पोशाक की धारणअभिषेक के उपरांत सुबह 5:30 बजे महारानी को पीले रंग की पोशाक धारण कराई जाएगी । सेवायतों द्वारा युगल स्वरूप की आरती उतारी जाएगी और सुबह करीब आठ बजे राधारानी शीश महल से भक्तों को दर्शन देंगी। दोपहर के बाद अपने सभी भक्तों को कृतार्थ करने के लिए राधारानी मंदिर से बाहर सफेद संगमरमर की छतरी में विराजमान होकर दर्शन देंगी।
