
आज भी इतिहास में दर्ज है उस दिन की होली का वर्णन
बारहसिंगे के सींगों को अड़ा कर लाठियों के प्रहार रोकते थे हुरियारे
तत्कालीन डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने लिखा है आंखों देखा वर्णन
विवेक दत्त मथुरिया
बरसाना (ब्रज ब्रेकिंग न्यूज)। आज से ठीक 151 साल पहले की बात है जब आज ही की तारीख यानी 22 फरवरी को बरसाना की रंगीली होली पड़ी थी। उस समय के मथुरा जिले डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने लठामार होली की प्रसिद्धि सुनकर बरसाना आकर इस होली को देखा और संपूर्ण वर्णन अपनी पुस्तक मथुरा ए डिस्ट्रिक्ट मेमोयर में लिखा।

यह बात है 22 फरवरी 1874 ईस्वी की। जब देश पर ब्रिटिश का शासन था। मथुरा का उस समय का डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट एक जिज्ञासु अंग्रेज था जिसका नाम था फ्रेडरिक सोलमन ग्राउस। ग्राउस ने जब बरसाना की लठामार होली का नाम सुना तो वह अचंभित हो गया और इसे देखने को लालायित हो गया। इसी होली को देखने का मन बनाकर वह अपने स्टॉफ में साथ घोड़े पर सवार होकर बरसाना की लठामार होली देखने निकल पड़ा। बरसाना पहुंच कर उसने मंदिर में नंदगांव और बरसाना के लोगों के मध्य होने वाला समाज गायन सुना। इस दौरान उसने नंदगांव के लोगों द्वारा गाई जा रही भांड बधाई को सुना और उसे अपनी डायरी में नोट कर लिया। बाद में जब उसने अपनी पुस्तक लिखी तो इस भांड बधाई को भी उसमें जस का तस लिख दिया।

बाद में लठामार होली का आयोजन देखने के लिए उसे कटारा हवेली के ऊपर एक छजली पर बिठाया गया। उन दिनों रंगीली गली के सामने हाथरस वाली धर्मशाला नहीं बनी थी इसलिए रंगीली गली से लेकर भूमिया तक खुला मैदान होता था। इस मैदान में उसने बरसाना की हुरियारिनों और नंदगांव के हुरियारों के बीच लठामार होली होती देखी। ग्राउस अपनी किताब में लिखता है कि लाठियों से बचने के लिए कुछ हुरियारों के पास चमड़े की बनी गोल ढालें थीं तो कुछ के पास बारहसिंगे के सींग थे जिन्हें वे लाठियों के आगे अड़ा कर खुद को बचाते थे।